मैं करती हूं दुआ

धूप-दीप जलाकर, थाल सजाकर,

मां को अक्सर देखा है मैंने ज्योति जलाते।

टीका करते, सिर झुकाते, वन्दन करते,

पिता को देखा है मैंने आरती उतारते।

हाथ जोड़कर, आंख मूंदकर देखा है मैंने

भाई-बहनों को आरती गाते

मां कहती है सबके दुख-दर्द मिटा दे मां

पिता मांगते सबको बुद्धि, अन्न-धन दे मां

भाई-बहन शिक्षा का आशीष मांगे

और सब करते मेरे लिए दुआ।

 

मां, पिता, भाई-बहनों की बातें सुनती हूं

आज मैं भी करती हूं तुमसे इन सबके लिए दुआ।