प्रेम-प्यार की बात न करना

प्रेम-प्यार की बात न करना,

घृणा के बीज हम बो रहे हैं।

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सम्बन्धों का मान नहीं अब,

दीवारें हम अब चिन रहे हैं।

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काले-गोरे की बात चल रही,

चेहरों को रंगों से पोत रहे हैं

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अमीर-गरीब की बात कर रहे,

पैसे से दुनिया को तोल रहे हैं

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कौन है सच्चा, कौन है झूठा,

बिन जाने हम कोस रहे हैं।

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पढ़ना-लिखना बात पुरानी

सुनी-सुनाई पर चल रहे हैं।

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सर्वधर्म समभाव भूल गये,

भेद-भाव हम ढो रहे हैं।

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अपने-अपने रूप चुन लिए,

किस्से रोज़ नये बुन रहे हैं।

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राजनीति का ज्ञान नहीं है

चर्चा में हम लगे हुए हैं।