कौन जाने सूरज उदित हुआ या अस्त

उस दिन जैसे ही सूरज डूबा,

अंधेरा होते ही

सामने के सारे पहाड़ समतल हो गये।

वैसे भी हर अंधेरा

समतल हुआ करता है,

और प्रकाश सतरंगा।

अंधेरा सुविधा हुआ करता है,

औेर प्रकाश सच्चाई।

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तुम चाहो तो अपने लिए

कोई भी रंग चुन लो।

हर रंग एक आकाश हुआ करता है,

एक अवकाश हुआ करता है।

मैं तो

बस इतना जानती हूं

कि सफ़ेद रंग

सात रंगों का मिश्रण।

यह एकता, शांति

और समझौते का प्रतीक,

-आधार सात रंग।

अतः बस इतना ध्यान रखना

कि सफे़द रंग तक पहुंचने के लिए

तुम्हें सभी रंगों से गुज़रना होगा।

-

पता नहीं सबने कैसे मान लिया

कि सूरज उगा करता है।

मैंने तो जब भी देखा

सूरज को डूबते ही देखा।

हर ओर पश्चिम ही पश्चिम है,

और हर कदम

अंधेरे की ओर बढ़ता कदम।

-  

मैं अक्सर चाहती हूं

कि कभी दिन रहते सूरज डूब जाये,

और दुनिया के लिए

खतरा उठ खड़ा हो।

-

सच कहना

क्या कभी तुमने सूरज उगता देखा है?

-

अगर तुमने कभी

सूरज को

उपर की ओर

आकाश की ओर बढ़ता देख लिया,

आग, तपिश और  रोशनी थी उसमें

बस !

इतने से ही तुमने मान लिया

कि सूरजा उग आया।

-

हर चढ़ता सूरज

मंजिल नहीं हुआ करता।

पता नहीं कब दिन ढल जाये।

और कभी-कभी तो सूरज चढ़ता ही नहीं,

और दिन ढल जाता है।

मैंने तो जब भी देखा

सूरज को ढलते ही देखा।

-

डूबते सूरज की पहचान,

अंधेरे से रोशनी की ओर,

अतल से उपर की ओर।

इसीलिए

मैंने तो जब भी देखा,

सूरज को डूबते ही देखा।

-

हर डूबता दिन,

उगते तारे,

एक नये आने वाले दिन का,

एक नयी जिंदगी का,

संदेश दे जाते हैं।

जाने वाले क्षण

आने वाले क्षणों के पोषक,

बता जाते हैं कि शाम केवल डूबती नहीं,

हर डूबने के पीछे

नया उदय ज़रूरी है।

हर शाम के पीछे

एक सुबह है,

और चांद के पीछे सूरज -

सूरज को तो डूबना ही है,

पर एक उदय का सपना लेकर ।