उड़ती चिड़िया के पर न गिनूं मैं

आप अब तक मेरी कविताएँ पढ़कर जान ही चुके होंगे कि मेरी विपरीत बुद्धि है। एक चित्र आया कावय रचना के लिए। आपको इस चित्र में किसके दर्शन हुए? मेरे सभी मित्रों को, किसी को विरहिणी नायिका दिखी, किसी को राधा, किसी को मीरा, किसी को बाट जोहती प्रेमिका आदि-आदि-इत्यादि। किन्तु मुझे जैसा यह चित्र प्रतीत हुआ, रचना आपके सामने है।

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फ़ोटू हो गई हो

मेरे सैयां

तो ये ताम-झाम हटवा दे।

इक कुर्सी-मेज़ ला दे।

उड़ती चिड़िया के पर न गिनूं मैं

फ़्रिज से

थोड़ा शीतल जल पिलवा दे।

कब तक नुमाईश करेगा मेरी,

आप आधुनिक बन बैठा है

मुझको भी नयी ड्रैस सिलवा दे।

अब खाना-वाना

न बनता मुझसे

स्वीगी से मंगवा दे।