अपना मान करना सीख

आधुनिकता के द्वार पर खड़ी नारी

कहने को आकाश छू रही है

पाताल नाप रही है

पुरुषों के साथ

कंधे से कंधा मिलाकर

चलने की शान मार रही है

घर-बाहर दोनों मोर्चों पर

जीतती नज़र आ रही है।

अपने अधिकारों की बात करती

कहीं भी कमतर

नज़र न आ रही है।

किन्तु यहां

क्यों मौन साध रही है?

न मोम की गुड़िया है,

न लाचार, अपंग।

फिर क्यों इस मोर्चे पर

हर बार

पराजित-सी हार रही है।

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पाखण्डों और परम्पराओं में

भेद करना सीख।

अपने हित में

अपने लिए बात करना सीख।

रूढ़ियों और रीतियों में

पहचान करना सीख।

अपनी कोमल-कान्त छवि से

बाहर निकल

गलत-सही में भेद करना सीख।

आवाज़ उठा

अपने लिए निर्णय लेना सीख।

सिर उठा,

आंख तरेर, आंख दिखा

आंख से आंख मिला

न डर।

तर्क कर, वितर्क कर

दो की चार कर

अपनी राहें आप नाप

हो निडर।

अपने कंधे पर अपना हाथ रख

अपने हाथ में अपना हाथ ले

न डर

सब बदल गये, सब बदल गया

तू भी बदल

अपना मान करना सीख

अपना मान रखना सीख।