ये कैसा सावन ये कैसा पानी

सावन की बरसे बदरिया

सोच-सोच मन घबराये।

बूंदें कब

जल-प्लावन बन जायेंगी

कब बहेगी धारा

सोच-सोच मन डर जाये।

-

नदिया का पानी

तट-बन्धों से जब टकराए

कब टूटेंगी सीमाएं

रात-रात नींद आये।

-

बिजली चमके

देख रहे, लाखों घर डूबे

कितनी गई जानें

मन सहम-सहम जाये।

-

कब आसमान से आयेगी विपदा

कौन रहेगा, कौन जायेगा

हाथों से हाथ छूट रहे

जाने ये कैसे दिन आये।

.

पुल टूटू, राहें बिखर गईं

खेतों में सागर लहराया

सूनी आंखों से ताक रहा किसान

देख-देख मन भर आये।

.

सिर पर छत रही

पैरों के नीचे धरा रही

कहां जा रहे, कहां रहे

कंधों पर लादे ज़िन्दगी

जाने हम किस राह  निकल आये।

-

कैसी विपदा ये आई

हाथ बांध हम खड़े रह गये

लूट ले गया घर-घर को

जल का तांडव,

कब निकलेगा पानी

कब लौटेंगे जीवन में

नहीं, नहीं, नहीं, हम समझ पाये।