ब्लॉक

कब सालों-साल बीत गये

पता ही नहीं लगा

जीवन बदल गया

दुनिया बदल गई

और मैं

वहीं की वहीं खड़ी

तुम्हारी यादों में।

प्रतिदिन

एक पत्र लिखती

और नष्ट कर देती।

अक्सर सोचा करती थी

जब मिलोगे

तो यह कहूँगी

वह कहूँगी।

किन्तु समय के साथ

पत्र यादों में रहने लगे

स्मृतियाँ धुँधलाने लगी

और चेहरा मिटने लगा।

 

पर उस दिन फ़ेसबुक पर

अनायास तुम्हारा चेहरा

दमक उठा

और मैं

एकाएक

लौट गई सालों पीछे

तुम्हारे साथ।

खोला तुम्हारा खाता

और चलाने लगी अंगुलियाँ

भावों का बांध

बिखरने लगा

अंगुलियाँ कंपकंपान लगीं

क्या कर रही हूँ मैं।

 

इतने सालों बाद

क्या लिखूँ अब

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