तल से अतल तक

तल से अतल तक

धरा से गगन तक

विस्तार है मेरा

काल के गाल में

टूटते हैं

बिखरते हैं

अकेलेपन से जूझते हैं

फिर संवरते हैं।

बस

इसी आस में

जीवन संवरते हैं !!!!!