आस लगाई

जिस-जिससे आस लगाई

उस-उसने बोला भाई।

-

मैं लेकर आया था

हार सुनहरा

बाद में वो बहुत पछताई।

फिर वो लौट-लौटकर आई

बार-बार हमसे आंख मिलाई।

हमने भी आंखें टेढ़ी कर लीं,

फिर वो लेकर राखी आई।

हमने भी धमकाया उसको

हम न तेरे भाई, हम न तेरे साईं।

बोले, अगर फिर लौटकर आई

तो  बुला लायेंगे तेरी माई।